ईसाई धर्म अपनाने वाले परिवार से डहरवाल कलार समाज ने तोड़ा रिश्ता
सुशील उचबगले की रिपोर्ट
गोरेघाट तिरोड़ी
संस्कार, संस्कृति और सनातन धर्म को छोड़कर धर्मपरिवर्तन करना समाज के माफी योग्य नहीं: राजेंद्र साकरे
चिखला बांध में डहरवाल कलार का जिलास्तरीय महासम्मेलन का हुआ आयोजन
बालाघाट। डहरवाल कलार समाज एक हिंदू समाज है, डहरवाल कलार समाज ने सनातन और समाज हित के उद्देश्य से ईसाई धर्म अपनाने वाले परिवारों से रिश्ता, नाता और संबंध नहीं रखने का फैसला लिया गया है। हमारे सनातनी (हिंदू) धर्मावलंबियों को पंथ और धर्मगुरु हमारे समाज के भोले-भाले और गरीब भाई- बहन को निशाना बनाकर धर्मपरिवर्तन करा रहे हैं, जो भाई- बहन अपने संस्कार और संस्कृति को छोड़कर दूसरे पंथ व धर्म को अपनाते ही सभी देवी देवताओं की मूर्तियों को विसर्जित कर देते हैं ऐसे धर्म को, हिन्दू धर्म होने का समाज दर्जा नहीं देता है व समाज माफ़ नहीं करेगा। उक्त बाते डहरवाल कलार समाज के महासम्मेलन में पक्ष विपक्ष के विचारों को सुनने के दौरान निष्कर्ष रूप से सामने आई, जिस पर देश प्रदेश व जिले भर से आए हुए पदाधिकारियों ने विचार विमर्श कर निर्णय निकाला की ईसाई धर्म अपनाने वाले सामाजिक बंधुओ से समाज दूरी बनाए रखेगा लेकिन जिन लोगों ने परमात्मा एक की राह अपनाई है वे अपने माता-पिता व सामाजिक संस्कारों व संस्कृति के साथ समाज में इस शर्त के साथ बने रहेंगें कि वे अपने इस पंथ का समाज में प्रचार-प्रसार नहीं करेंगे और हमारे देवी देवताओं का सम्मान करते रहेंगे यह उद्गार जिला अध्यक्ष राजेंद्र साकरे जी द्वारा पदाधिकारी के निष्कर्ष स्वरूप पूरे महासम्मेलन के दौरान दिए एवं महासम्मेलन में उपस्थित सभी सामाजिक बंधुओ ने इसका समर्थन भी किया।

कलार समाज संगठन द्वारा आयोजित डहरवाल कलार वर्ग का जिलास्तरीय महासम्मेलन 11 जनवरी को खैरलांजी तहसील के ग्राम चिखला बांध में भव्य स्तर से सम्पन्न हुआ। जिसमें डहरवाल कलार समाज के जिलाध्यक्ष राजेन्द्र साकरे ने यह बात कहीं ।
डहरवाल कलार समाज निरंतर अपने संस्कार और संस्कृति को लेकर सचेत है जिसके लिए 2017 से प्रतिवर्ष एक सामाजिक कुरीति पर ग्राम से लेकर जिले व प्रात तक बैठके लेते हुए विस्तृत चर्चा की जाती है एवं उसे चर्चा के उपरांत एक बड़ी बैठक सह-महासम्मेलन कर पुनः उस पर विचार किया जाता है और विचारोंप्रांत संगठन जिला अध्यक्ष द्वारा निष्कर्ष को समाज के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है और समर्थन उपरांत निर्णय पारित किया जाता है ताकि डहरवाल समाज अपनी आने वाली पीढ़ी को एक संस्कारवान व सु-संस्कृत समाज उपलब्ध करा सके।

कलार समाज का सर्वांगीण विकास के लिए सम्मेलन होते जा रहा हैं। इसी तारतम्य में अतिथियों द्वारा भगवान सहस्त्रबाहु की पूजा अर्चना कर सम्मेलन का आयोजन ग्राम समिति चिखलाबांध एवं दैतबर्रा के द्वारा किया गया। इस अवसर पर समाज के वरिष्ठजनों को सम्मानित किया गया और युवक युवतियों का परिचय सम्मेलन में बढ़चढ़ कर युवा वर्ग ने हिस्सा लिया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि नरेश उचबगले, सुनिल नगरगडे और जिला डहरवाल कलार समाज के संयोजक डी. सी. डहरवाल, सह संयोजक व संगठन मंत्री शिवाजी बाविसताले, प्रयागराज सुहागपुरे, जिला अध्यक्ष राजेंद्र साकरे, दुर्गाप्रसाद बाविसताले, जिला कोषाध्यक्ष परदेशी राठौर, रमन बिठले, लक्खू पटेल, रामचंद साकरे, विजय बाविसताले, आशीष डहरवाल, सुशील उचबगले, हितेश डहरवाल, शिवकुमार शिवने, देवीलाल जामुनपाने, कृष्णकुमार उचबगले, सुनिल मंडलेकर, रवि मंडलेकर, भाऊलाल आवरपाने , विलास डहरवाल सौसर सहित ग्राम चिखला बांध के जिलाध्यक्ष रोहनलाल बघेल, मनोज बिठले, विरेंद्र बिठले, निखी मण्डलेकर, राजू जामुनपाने, राहुल बिठले सहित ग्रामीणों की मौजूदगी। डहरवाल कलार संगठन के द्वारा समाज को अग्रसर करने के लिए प्रतिवर्ष एक विषय चर्चा की जाती है, पहले शादी समारोह में लग्न लगने का समय 11 बजे रात्रि तक तय किया गया। फिर मृत्युभोज पर सदा भोज करने का निर्णय लिया गया और अब इस बार समाज में चल रहा धर्मपरिवर्तन को लेकर मुद्दा, चर्चा और कुरीतियों को खत्म करने का उद्देश्य रखा गया।
डहरवाल कलार समाज जिलाध्यक्ष राजेन्द्र साकरे ने कहा कि डहरवाल वर्ग का प्रति वर्षानुसार इस वर्ष भी महासम्मेलन का आयोजन चिखला बांध में किया गया। धर्मपरिवर्तन को लेकर उन्होंने कहा कि समाज में एक पंथ अपने आप को हिन्दू मानता हैं और उस पंथ को अपनाने ही अपने संस्कार, संस्कृति और सनातन धर्म को भूल जाते हैं यहीं नहीं वह अपने कुलदेवता, सभी देवी देवताओं की मूर्तियों को विसर्जित कर देते हैं फिर यह हिंदू कैसे हो सकते हैं। यह अपने धर्म को छोड़कर दूसरे पंथ व धर्म में सामिल हो रहे हैं। यह केवल समाज को तोड़ना, परिवार में विवाद उत्पन करना है, जो डहरवाल समाज ऐसे परिवारों को माफ़ नहीं करेगा जो अपने धर्म को छोड़कर दूसरे पंथ को अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाज ने धर्मपरिवर्तन को लेकर बड़ा कदम उठाया है और ईसाई धर्म को अपनाने वाले समाज के परिवारों से समाज कोई भी नाता रिश्ता नहीं रखता हैं।
