“खरा इंसान,पत्थर समान”
******** “अंकुर” ********
बड़े ही खरे इंसान होते हैं,मिशन के लिए रोज काम करने वाले,
कभी भी डरे इंसान नहीं होते,बुद्ध का सम्मान करने वाले।
कारवां उनसे शुरू होता हैं,वो होते हैं कभी भी नहीं रुकने वाले,
होते है नेक धम्म के भीम सिपाही, सोते हैं मौकों से चूकने वाले।
गिरा न सके मुझे मेरा दुश्मन कभी, रोज़ हैरान हैं मेरे कामों से चौंकने वाले।
बड़ी कठिन है सत्य की लड़ाई “अंकुर”, लाखों खड़े हैं बेकार भौंकने वाले।
तू डाल_डाल मैं पात_पात हूं,हम अबैर का चलन सौंपने वाले,
कोई करे यदि दो नावों पर सवारी, हम मैत्रीवश उन्हें रोकने वाले।
(आशु सृजन_16मार्च2026,सोम.)
