न्याय दो के नारों से गूंजा बालाघाट मप्र
3सितंबर 2026गुरुवार को आदिवासी बैगा समाज सहित सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने बच्चों की मौत पर जबरदस्त आंदोलन किया है। अन्य प्रदेशों के सामाजिक नेता,आदिवासी समाज की अनिश्चितकालीन हड़ताल और बंद में शामिल हुए।शहर की रफ्तार थम सी गई।
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में कथित तौर पर 30 से अधिक बच्चों की मौत के विरोध में आदिवासी समाज ने मोर्चा खोल आदिवासी विकास परिषद , संयुक्त सामाजिक संगठनों के आह्वान पर गुरुवार को बालाघाट पूरी तरह बंद रहा इस दौरान शहर की दुकान बंद रही ,बाजारों में सन्नाटा फसर रहा, और आवागमन में बसों के पहिए भी थम गए। बंद के दौरान आपातकालीन सेवाओं को मुक्त रखा गया जिससे आम जनता को पूरी तरह सुविधा का सामना न करना पड़ा स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे और अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की गई ।आदिवासी विकास परिषद के जिला अध्यक्ष दिनेश धुर्वे ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए स्वास्थ्य मंत्री सहित लापरवाह गैर जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारियों के तत्काल स्थिति की मांग की । सतीश pendam बिरसा ब्रिगेड संस्थापक ने बच्चों की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग विभाग और महिला बाल विकास विभाग , जिम्मेदार अधिकारियों को भी तुरंत निलंबित करने की मांग की ।वही कुपोषण और प्रशासनिक लापरवाही पर भी सवाल उठाया गया। इंजीनियर प्रशांत भाऊ मेश्राम ने आरोप लगाया कि कुपोषण और समय पर टीकाकरण ना होने के कारण मासूम बच्चों की जान जा रही है आदिवासी बच्चों की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी सरकार की है ।बैगा आदिवासी के लिए दी जाने वाली सहायता जिसका वहां के समाज को किसी प्रकार का लाभ न मिल पाने की वजह से 30 बच्चों की जान गई है साथ ही अस्पताल के अंदर लगभग 150 बालक वर्तमान में मरीज बनकर देखे जा सकते है। जिसकी जिम्मेदारी पूरी सरकार कीहैं उन्होंने सवाल उठाया है क्या आदिवासियों के कल्याण के लिए जो आने वाला बजट और राशि इसका सही उपयोग कहां किया जा रहा है सरकार को इस बात की जिम्मेदारी लेकर के सार्वजनिक करना होगा प्रदर्शन में बालाघाट के अलावा अन्य प्रदेश के आदिवासी अंचलों नेताओं ने भी शिरकत किया और प्रतिनिधि शामिल हुई जिसमें दिया जाने वाली सहायता राशि को ₹100000 किया जावे मांग की गई।एक करोड रुपए की मांग पूर्व सांसद कंकर मुजरे,ने शासन से की है, ऐसा नहीं करने पर बड़े पैमाने पर भोपाल में आंदोलन की तैयारी में जुटे हुए होने की बात कहा है समस्त प्रदर्शनकारियों ने मांग की सरकार प्रतीक मृतक बच्चे के परिवार को आर्थिक रूप से तत्काल सहायता प्रदान करें जिससे प्रशासनिक हलको में भी हड़कम मचा हुआ है ।और स्थिति पर प्रशासन की पैनी नजर बनी हुई है।

बालाघाट जिले में बैगा आदिवासी बच्चों की मौत पर बंद में संपादक JBT आवाज, जन्मभूमि टाइम्स दैनिक अखबार सुरेन्द्र गजभिये, kk Kawya क्रिएटर ग्रुप चर्चा करते हुए।

