महिला सशक्तिकरण और आस्था का प्रतीक: धूमधाम से मनाया गया अखंड सौभाग्य का महापर्व ‘तीज’
सुशील उचबगले की रिपोर्ट
गोरेघाट तिरोड़ी
हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी अखंड सौभाग्य और अटूट श्रद्धा का महापर्व ‘तीज’ ग्राम गोरेघाट सहित सभी क्षेत्रों में अत्यंत हर्षोल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। भगवान शिव और माता पार्वती के पावन पुनर्मिलन की याद में मनाए जाने वाले इस त्योहार को लेकर महिलाओं और कुंवारी कन्याओं में भारी उत्साह देखा गया। ग्राम गोरेघाट पूरा भक्तिमय हो गया।
निर्जला व्रत रख महिलाओं ने की सुख-समृद्धि की कामना
सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए पूरे दिन और रात का कठिन निर्जला (बिना अन्न-जल के) व्रत रखा। वहीं, कुंवारी कन्याओं ने भी मनचाहा और योग्य वर पाने की कामना के साथ इस पावन उपवास को पूरी निष्ठा से पूरा किया।
सोलह श्रृंगार और पारंपरिक गीतों से गूंज उठे आंगन
त्योहार के अवसर पर महिलाओं का पारंपरिक रूप से सजना-संवरना मुख्य आकर्षण रहा। हरे और लाल रंग के सुंदर परिधानों, रंग-बिरंगी चूड़ियों और हाथों में रची गहरी मेहंदी के साथ महिलाओं ने सोलह श्रृंगार किया। शाम के समय मोहल्लों और घरों में विशेष पूजा का आयोजन किया गया, जहां महिलाओं ने मिट्टी से भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमाएं बनाकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।

सामूहिक लोकगीत की रही धूम
पूजा के बाद महिलाओं ने एकत्र होकर पारंपरिक तीज की व्रत कथा सुनी। देर रात तक चलने वाले भजनों और मांगलिक गीतों से पूरा माहौल भक्तिमय बना रहा। बुजुर्ग महिलाओं ने नवविवाहितों को अखंड सौभाग्यवती रहने का आशीर्वाद दिया।
यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था को दर्शाता है, बल्कि आपसी सौहार्द, संस्कृति और नारी शक्ति के गौरवमयी स्वरूप को भी बयां करता है।

