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सिविल अस्पताल लांजी में सीजर ऑपरेशन के नाम पर फिर पैसे लेन देन का आरोप

सिविल अस्पताल लांजी में सीजर ऑपरेशन के नाम पर फिर पैसे लेन देन का आरोप

बीएमओ ने लिखित शिकायत मिलने पर जांच का दिया आश्वासन

लांजी। जिले में स्वास्थ्य विभाग में स्थांनातरण को लेकर लेन देन का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ है और उक्त मामले से जहां स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है उसी बीच सिविल अस्पताल में अच्छा उपचार और चिकित्सकों के नवाचार का जहां नगर सहित क्षेत्र के लोगों को लगातार फायदा मिल रहा है तो दूसरी ओर सिविल अस्पताल में प्रसूता महिलाओं के सीजर आपरेशन में रूपयों के लेन देन के आरोप ने फिर एक बार अस्पताल और चिकित्सकों की धूमिल करने का प्रयास किया है। ताजा मामला बीते माह की आखिर सप्ताह में हुए सीजर ऑपरेशन कैंप का है जहां एक आशा कार्यकर्ता द्वारा वार्ड नं. 2 आवास कॉलोनी निवासी प्रसूता महिला से ऑपरेशन के पूर्व चिकित्सक के नाम पर 4000 रूपये लेने का आरोप लगा है। वहीं जब इस संबंध में शिकायत की जानकारी रूपये लेने वाली आशा कार्यकर्ता को लगी तो कार्यवाही के भय से उसके द्वारा पीडि़ता की सास को 18 सितंबर की रात 11.30 बजे घर जाकर पैसे लौटाने की जानकारी सामने आई है। जब इस संंबंध में सिविल अस्पताल के बीएमओ अक्षय उपराड़े से चर्चा की गई तो उन्होने कहा की इस संबंध में शिकायतकर्ता लिखित शिकायत दें तो हमारे द्वारा सख्त कार्यवाही की जाएगी। ऐसे में जब सिविल अस्पताल की सेवाओं के प्रति नगर सहित क्षेत्र के लोगों का रूझान बढ़ रहा है और बड़ी संख्या में लोग विश्वास के साथ यहां इलाज के लिये पहुंच रहे हैं, ऐसी घटना से लोगों को धक्का पहुंचा है।

फिर शुरू हुआ ऑपरेशन के नाम पर पैसे लेन देन का खेल…..

उल्लेखनीय है की कुछ समय पूर्व सिविल अस्पताल लांजी में प्रसूता महिलाओं के परिजनों से सीजर ऑपरेशन के नाम पर धड़ल्ले से बेखौफ होकर वसूली की जाती थी जिसमें यहां पूर्व में पदस्थ चिकित्सकों का केस लाने वाली आशा कार्यकर्ताओं का पूर्ण संरक्षण था परंतु शासन प्रशासन द्वारा सिविल अस्तपाल में जब से नये चिकित्सकों की पदस्थापना की गई तो अस्पताल की व्यवस्थाओं और रूपयों की लेन देन के कारनामों में शून्यता आ चुकी थी परंतु समय बीतने के साथ-साथ सिविल अस्पताल में खासकर सीजर ऑपरेशन के समय यह खेल पुन: शुरू हो गया है जिससे अस्पताल और चिकित्सकों दोनो ही छवि खराब हो रही है।

टांका खोलने के नाम पर लिए 200 रुपए….

प्रसूता के पति ने जानकारी देते हुए बताया कि आपरेशन के कुछ दिन बाद जब वो अपनी पत्नी को लेकर टांका खुलवाने सिविल अस्पलात लेकर आया तब भी आशा कार्यकर्ता द्वारा टांका खोलने के लिए 200 रुपए मांगे गए थे, जिसके बाद प्रसूता के पति द्वारा अपना मोबाइल गिरवी रखकर 200 रुपए दिए गए उसके बाद महिला के टांके खोले गए।

एक ही मेडिकल पर ‘मेहरबान आशाएं….

दूसरी ओर ऑपरेशन के बाद जब चिकित्सक द्वारा दवाईयां लिखी जाती है तो आशा कार्यकर्ताओं द्वारा जानबूझकर अस्पताल से दवाएं न लेकर एक ही मेडिकल से दवाएं लेने का दबाव बनाया जाता है। और वहां से भी मोटा कमीशन प्राप्त किया जा रहा है इससे पूर्व भी उक्त मेडिकल से ही आशाओं द्वारा दवाएं लेने के आरोप लगते रहे है परंंतु कार्यवाही नहीं होने के चलते यह सिलसिला फिर जोर पकडऩे लगा है। दुकानदार द्वारा भी प्रत्येक आशा कार्यकर्ताओं को उनकी खरीदारी के हिसाब से मोटा कमीशन दिया जाता है जिससे सभी आशा कार्यकर्ताएं अन्य दुकानों को छोड़कर इसी मेडिकल पर दवाएं लेने के लिये ‘मेहरबानÓ है। जिस पर स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ चिकित्सकों और अधिकारियों को ध्यान देने की नितांत आवश्यकता है।

इनका कहना है….

इस संबंध में जो भी शिकायतकर्ता है वह मुझे लिखित में शिकायत दें तो हमारे द्वारा दोषियों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही की जाएगी।

अक्षय उपराड़े

बीएमओ लांजी

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