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Healthy Kidney: थकावट, सूजन और पेशाब का बार-बार आना? हो सकती है किडनी की तबाही की पहली दस्तक

Healthy Kidney: भारत में किडनी से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, गलत खानपान और जीवनशैली की वजह से लोगों की किडनी समय से पहले ही खराब हो रही है। खासकर 40 साल की उम्र के बाद यह खतरा और बढ़ जाता है। जब किडनी ठीक से काम नहीं करती तो शरीर में थकान, सूजन, पेशाब में खून और रात में बार-बार पेशाब जैसे लक्षण दिखने लगते हैं। ऐसे में समय रहते जांच और इलाज बहुत जरूरी हो जाता है ताकि ट्रांसप्लांट जैसी स्थिति न आए।

किडनी की जांच क्यों है जरूरी

सफदरजंग अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. हिमांशु वर्मा बताते हैं कि किडनी के इलाज से पहले उसका समय पर परीक्षण सबसे अहम होता है। बहुत से लोग लक्षणों को मामूली समझ कर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे स्थिति गंभीर हो जाती है। इसलिए डॉक्टर सलाह देते हैं कि जिन्हें पहले से डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर है, उन्हें हर 6 महीने में Kidney Function Test (KFT) जरूर कराना चाहिए। यह टेस्ट बेहद आसान और सस्ता है और इसके जरिए समय रहते बीमारी का पता लगाया जा सकता है।

Healthy Kidney: थकावट, सूजन और पेशाब का बार-बार आना? हो सकती है किडनी की तबाही की पहली दस्तक

सीरम क्रिएटिनिन और BUN टेस्ट से मिलते हैं साफ संकेत

KFT के तहत कई तरह के टेस्ट किए जाते हैं। पहला टेस्ट है सीरम क्रिएटिनिन जिसमें खून में क्रिएटिनिन की मात्रा देखी जाती है। यह एक वेस्ट प्रोडक्ट होता है जो मांसपेशियों से निकलता है और किडनी के जरिए बाहर आता है। अगर इसका लेवल पुरुषों में 1.2 mg/dL और महिलाओं में 1.1 mg/dL से ज्यादा हो तो यह किडनी की कमजोरी का संकेत हो सकता है। दूसरा अहम टेस्ट है ब्लड यूरिया नाइट्रोजन (BUN)। इसमें खून में यूरिया की मात्रा मापी जाती है। सामान्य स्तर 7 से 20 mg/dL होना चाहिए। इससे अधिक मात्रा किडनी फेलियर की तरफ इशारा करती है।

यूरीन रूटीन टेस्ट से भी मिलते हैं खतरे के संकेत

तीसरा और जरूरी टेस्ट है यूरीन रूटीन टेस्ट जिसमें पेशाब में प्रोटीन, खून, शुगर या अन्य गड़बड़ियों की जांच की जाती है। अगर पेशाब में अलब्युमिन नामक प्रोटीन 30 mg/g से ज्यादा पाया जाता है तो यह शुरुआती किडनी डैमेज का संकेत हो सकता है। कई बार यह टेस्ट बिना लक्षणों के भी बीमारी का पता लगा देता है, जिससे समय रहते इलाज शुरू किया जा सकता है।

किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT) की कीमत शहर और लैब के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है। आमतौर पर यह ₹350 से ₹1200 के बीच हो सकता है। सरकारी अस्पतालों में यह टेस्ट या तो मुफ्त होता है या बहुत ही कम कीमत पर किया जाता है। जिन लोगों को डायबिटीज, ब्लड प्रेशर या पारिवारिक हिस्ट्री है, उन्हें हर 6 महीने में यह जांच जरूर करानी चाहिए। यह छोटा सा टेस्ट किडनी की बड़ी परेशानी से बचा सकता है।

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