Kidney Damage: हमारा शरीर एक जुड़ी हुई प्रणाली है। जब एक अंग पर असर पड़ता है तो उसका प्रभाव बाकी हिस्सों पर भी पड़ता है। डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर दो ऐसी बीमारियाँ हैं जो न केवल अपने स्तर पर खतरनाक हैं बल्कि ये किडनी की कार्यक्षमता को भी चुपचाप नुकसान पहुँचाती हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार 70-80% क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) के मामलों के पीछे यही दो बीमारियाँ जिम्मेदार हैं।
डायबिटीज में जब ब्लड में शुगर लेवल ज्यादा हो जाता है तो यह किडनी की सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुँचाता है जिसे डायबिटिक नेफ्रोपैथी कहा जाता है। वहीं हाई ब्लड प्रेशर किडनी की रक्त वाहिकाओं पर अधिक दबाव डालता है जिससे उनकी फिल्टरिंग क्षमता घटती जाती है। जब दोनों समस्याएं एक साथ हों तो किडनी डैमेज का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
जब किडनी चुपचाप जवाब देने लगे
किडनी की बीमारी अकसर शुरुआती चरणों में कोई लक्षण नहीं दिखाती। लेकिन धीरे-धीरे शरीर में पानी और सोडियम रुकने लगता है जिससे बीपी और बिगड़ता है। ये एक ऐसा साइलेंट साइकल है जो तब तक नहीं पकड़ में आता जब तक कि स्थिति गंभीर न हो जाए। इसीलिए डायबिटीज और बीपी मरीजों को हर साल किडनी की जांच करवाते रहना चाहिए।
ऐसे पहचानें किडनी से जुड़ी चेतावनी के संकेत
जब किडनी की कार्यक्षमता घटने लगती है तो शरीर कुछ संकेत देने लगता है। जैसे कि पैरों, टखनों या चेहरे पर सूजन, बार-बार पेशाब आना खासकर रात में, झागदार पेशाब, थकान, कमजोरी या भूख में कमी और ब्लड प्रेशर का नियंत्रण में न आना। ये सभी संकेत बताते हैं कि किडनी मदद मांग रही है।
किडनी की सेहत बनाए रखने के लिए जरूरी है कि ब्लड शुगर और बीपी को नियंत्रित रखें। डायबिटीज मरीजों के लिए HbA1c 7% से कम और बीपी 130/80 mmHg से नीचे होना चाहिए। साल में एक बार ब्लड और यूरिन टेस्ट कराएं। खानपान में नमक, चीनी, तली चीजें और रेड मीट से दूरी बनाएं। फल, सब्जियाँ और होल ग्रेन्स को भोजन में शामिल करें। रोज कम से कम 30 मिनट टहलें या योग करें और 8-10 गिलास पानी ज़रूर पिएं। बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं न लें, खासकर पेनकिलर।