Pregnancy Baby Development: गर्भावस्था के समय महिला का शरीर सिर्फ खुद के लिए नहीं बल्कि गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए भी पोषण जुटाता है। डॉ सलोनी चड्ढा के अनुसार बहुत सी महिलाएं इस दौरान भूख न लगने या मन न होने के कारण जरूरी पोषक तत्वों को नजरअंदाज कर देती हैं। इससे बच्चे को जरूरी विटामिन आयरन कैल्शियम और फोलिक एसिड नहीं मिल पाता। यह उसकी शारीरिक और मानसिक विकास में रुकावट पैदा कर सकता है। इसलिए हरी सब्जियां फल दूध दाल ड्राय फ्रूट्स और फोलिक एसिड युक्त चीजें रोजाना भोजन में शामिल करें। डॉक्टर से समय समय पर डायट प्लान जरूर लेते रहें।
नींद की कमी से बिगड़ता है संतुलन
गर्भावस्था में शरीर को पहले से ज्यादा आराम और नींद की जरूरत होती है। अगर मां को पूरी नींद नहीं मिलती तो इसका असर सीधे हार्मोन बैलेंस पर पड़ता है जिससे बच्चे के विकास में रुकावट आ सकती है। नींद की कमी से चिड़चिड़ापन थकावट और ब्लड प्रेशर की समस्या भी हो सकती है। इसलिए हर दिन कम से कम आठ से नौ घंटे की नींद जरूर लें और दिन में थोड़ा बहुत आराम भी करें। सोने का समय नियमित रखें और स्क्रीन टाइम कम करें ताकि दिमाग को पूरा आराम मिले।
अगर गर्भवती महिला लगातार तनाव या चिंता में रहती है तो इसका असर न केवल मां बल्कि गर्भ में पल रहे बच्चे के मस्तिष्क पर भी पड़ता है। शरीर में तनाव के कारण कोर्टिसोल नामक हार्मोन बढ़ता है जो बच्चे के ब्रेन डेवलपमेंट को प्रभावित कर सकता है। इससे बचने के लिए मेडिटेशन हल्का योग अच्छी किताबें पढ़ना या पसंदीदा संगीत सुनना फायदेमंद हो सकता है। अगर जरूरत हो तो परिवार से मदद लें या प्रोफेशनल काउंसलिंग का सहारा लें।
धूम्रपान शराब और नशा पूरी तरह से त्यागें
गर्भवती महिला द्वारा धूम्रपान शराब या किसी भी नशीली चीज का सेवन सीधे बच्चे के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे बच्चे का वजन कम रह सकता है समय से पहले प्रसव या गर्भपात तक हो सकता है। केवल नशा करना ही नहीं बल्कि नशा करने वालों के आसपास रहना यानी सेकंड हैंड स्मोक भी नुकसानदायक होता है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान पूरी तरह से नशे से दूरी बनाएं और ऐसे माहौल से खुद को दूर रखें।
डॉ सलोनी चड्ढा का कहना है कि गर्भावस्था में नियमित चेकअप और जरूरी सप्लीमेंट जैसे आयरन कैल्शियम और फोलिक एसिड लेना बहुत जरूरी है। बहुत सी महिलाएं इन बातों को हल्के में लेती हैं जिससे बच्चे के अंगों के विकास में समस्या हो सकती है और डिलीवरी के समय जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं। डॉक्टर द्वारा दी गई दवाइयों और सप्लीमेंट्स को समय पर लें और हर महीने होने वाली जांच को कभी भी टालें नहीं। इससे मां और बच्चे दोनों की सेहत पर सकारात्मक असर पड़ता है।