*किसानों की सिंचाई समस्या दूर करने विधायक गौरव सिंह पारधी के प्रयास तेज, राजीव सागर और भीमगढ़ बांध से पहुंचने लगा पानी*

*खैरलांजी क्षेत्र के प्रभावित गांवों में सिंचाई व्यवस्था की समीक्षा, अधिकारियों और किसानों के साथ बैठक कर अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने पर जोर*
खैरलांजी। खेती-किसानी में सिंचाई के पानी का समय पर मिलना किसानों की मेहनत और फसल की बेहतर पैदावार के लिए बेहद जरूरी है। ऐसे में जब खैरलांजी क्षेत्र के किसानों को पिछले एक सप्ताह से सिंचाई के लिए पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा था, तब इस समस्या के समाधान के लिए विधायक श्री गौरव सिंह पारधी द्वारा लगातार प्रयास किए गए। किसानों की परेशानी को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने संबंधित विभाग के अधिकारियों के साथ समन्वय कर राजीव सागर एवं भीमगढ़ बांध से क्षेत्र में सिंचाई का पानी पहुंचाने की दिशा में पहल की, जिसके सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजीव सागर और भीमगढ़ बांध का पानी अब क्षेत्र में पहुंचने लगा है। उम्मीद है कि आज के दिन तक खैरलांजी क्षेत्र के किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप सिंचाई का पानी मिलने लगेगा। यह क्षेत्र के उन किसानों के लिए राहत भरी खबर है, जो पिछले कई दिनों से अपनी फसलों की सिंचाई को लेकर चिंतित थे।
*विधायक गौरव सिंह पारधी ने प्रभावित गांवों में की समीक्षा बैठक*
सिंचाई व्यवस्था की स्थिति जानने और किसानों की समस्याओं को समझने के लिए विधायक गौरव सिंह पारधी ने अंसेरा, कचेखनी, किन्ही, कटोरी एवं बैजू मोहगांव में सिंचाई विभाग के अधिकारियों और किसानों के साथ बैठक की। इस दौरान पानी की उपलब्धता, वितरण व्यवस्था और प्रभावित क्षेत्रों में आ रही दिक्कतों पर चर्चा कर आवश्यक समन्वय बनाने पर जोर दिया गया।
*अंतिम छोर तक पानी पहुंचाना प्राथमिकता – गौरव सिंह पारधी*
विधायक ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि बांधों से पानी पहुंचने के साथ ही उसका वितरण भी व्यवस्थित हो, ताकि जरूरतमंद किसानों को समय पर सिंचाई के लिए पानी मिल सके। विशेष रूप से नहरों के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने और स्थानीय स्तर पर आने वाली समस्याओं के समाधान पर ध्यान दिया गया।
खेती के इस महत्वपूर्ण समय में सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता किसानों के लिए बेहद जरूरी है। राजीव सागर और भीमगढ़ बांध से आपूर्ति शुरू होने से खैरलांजी क्षेत्र के किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है। अब प्रयास है कि पानी जरूरत के अनुरूप संबंधित गांवों और किसानों के खेतों तक पहुंचे।

