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Artificial Intelligence: क्या नई तकनीक हमें बना रही है आलसी और बेवकूफ? क्या AI छीन रहा है आपकी सोचने की शक्ति

Artificial Intelligence: AI ने हमारी जिंदगी के कई हिस्सों को बेहद आसान बना दिया है। पहले जो काम घंटों में होते थे अब मिनटों में हो जाते हैं। ChatGPT और Google Gemini जैसे टूल्स ने कोडिंग से लेकर सीखने तक की प्रक्रिया को आसान कर दिया है। लेकिन अब एक चिंता की बात सामने आ रही है कि AI हमारे दिमाग को कमजोर कर रहा है। काम तो जल्दी हो रहा है लेकिन सोचने और समझने की ताकत धीरे धीरे कम हो रही है।

रिसर्च ने खोली AI की सच्चाई

Microsoft और Carnegie Mellon University ने मिलकर एक रिसर्च की जिसमें यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि अगर AI का सही तरीके से उपयोग न किया जाए तो यह हमारी मानसिक क्षमता को नुकसान पहुंचा सकता है। खासतौर पर वो स्किल्स जो समय के साथ बेहतर होनी चाहिए। जब लोग हर छोटी बात में AI का सहारा लेते हैं तो वे खुद सोचने और समझने से कतराने लगते हैं। इससे उनका ध्यान समाधान खोजने से हटकर सिर्फ AI के जवाब को मानने पर आ जाता है।

Artificial Intelligence: क्या नई तकनीक हमें बना रही है आलसी और बेवकूफ? क्या AI छीन रहा है आपकी सोचने की शक्ति

धीरे धीरे कमजोर हो रही है हमारी सोच

रिसर्च में साफ बताया गया है कि AI पर ज़्यादा निर्भरता से हमारी रोजमर्रा के फैसले लेने की क्षमता पर असर पड़ता है। लोग खुद से सोचने की जगह अब मशीनों पर भरोसा करने लगे हैं। इससे उनका दिमाग धीरे धीरे कमज़ोर पड़ता है और समस्या हल करने की ताकत भी घटती जाती है। इससे यह साफ होता है कि अगर AI का ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल किया गया तो इंसान खुद की सोचने की शक्ति ही खो बैठता है।

319 लोगों पर हुई स्टडी के चौंकाने वाले नतीजे

इस रिसर्च में कुल 319 लोग शामिल हुए जो हफ्ते में कम से कम एक बार जेनरेटिव AI का इस्तेमाल करते थे। उनसे पूछा गया कि वे AI को किस तरह से उपयोग में लाते हैं जैसे ईमेल लिखने के लिए या किसी विषय पर जानकारी इकट्ठा करने के लिए या डाटा चार्ट में बदलाव करने के लिए। उनमें से 36 प्रतिशत लोगों ने माना कि वे AI की मदद लेते हुए खुद भी सोचते हैं और AI से होने वाले खतरों को ध्यान में रखते हैं। लेकिन 64 प्रतिशत लोग ऐसे थे जो AI पर पूरी तरह निर्भर रहते हैं और खुद से सोचने की कोशिश भी नहीं करते।

AI बना रहा है हमें आलसी और कमजोर

इस रिसर्च से यह भी साबित हुआ कि जो लोग AI पर आंख मूंदकर भरोसा करते हैं वे न केवल कम सोचते हैं बल्कि धीरे धीरे आलसी भी हो जाते हैं। उन्हें कोई भी काम खुद से करने की आदत नहीं रह जाती। यही कारण है कि इंसान की बौद्धिक क्षमता पर सीधा असर पड़ता है। जब हर सवाल का जवाब कुछ ही सेकेंड में मिल जाता है तो इंसान का दिमाग प्रयास करना ही छोड़ देता है। इसका नतीजा यह होता है कि धीरे धीरे हमारी समझने और सोचने की ताकत खत्म होने लगती है।

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