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आयुष्मान आरोग्य मंदिर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गोरेघाट की बिगड़ी हालत

आयुष्मान आरोग्य मंदिर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गोरेघाट की बिगड़ी हालत
सुशील उचबगले की रिपोर्ट
गोरेघाट तिरोड़ी
जिला मुख्यालय से 100 किलोमीटर और विकासखंड कटंगी से 50 किलोमीटर दूर आयुष्मान आरोग्य मंदिर गोरेघाट के हालत काफी खराब हो चुकी है ऐसा लगता है यह अस्पताल जहां लोगों की जान बचाई जाती है मगर इस अस्पताल की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि बाहर से तो ऐसा लगता हैं कि यह अस्पताल नहीं बल्कि कोई पुराने जमाने का मकान होगा जो अब खंडहर में बदल चुका है। देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि यहां कोई रहता नहीं होगा ये तो हुई बिल्डिंग की हालत, जैसे यह बिल्डिंग की हालत बाहर से है उससे भी कही ज्यादा यह अंदर से खराब हो चुका है। यहाँ स्टाफ के रहने के लिए पांच कमरे है जिसमें बड़ी बड़ी दरारें आ चुकी है और अस्पताल के आस पास खेती लगी है जिससे इस जगह पर सर्प, बिच्छू निकलना आम बात है।

कुछ बचा ही नहीं है

आयुष्मान आरोग्य मंदिर गोरेघाट में अब अंदर कुछ बचा ही नहीं है इसके अंतर्गत ग्राम भोंडकी, संग्रामपुर , हेटी कुड़वा, खैरलांजी,आगरी, अम्बेझरी, कन्हड़गांव,चुटकीदेवरी, कुड़वा कॉलोनी, पथरापेट आदि गांव आते है जिसमे ना बीपी मशीन है, ना शुगर मशीन है, और ना ही कोई उपकरण जिससे मरीजों और गर्भवती महिलाओं की प्राथमिक जांच हो सके। जबकि मरीजों चाहे डॉक्टर चेक करे या नर्सिंग ऑफिसर पहले बीपी चेक किया जाता है और कुछ समस्या लगी तो शुगर की जांच की जाती है मगर इनके अभाव में बीपी वाला और शुगर वाला मरीज भी बिना जांच किये वापस चले जाता है। गर्भवती महिलाओं की ये कैसे जांच करते होंगे हम समझ सकते है जबकि गांव में एक छोटा डॉक्टर भी बिना बीपी और शुगर जांच किये इलाज नहीं करता है मगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गोरेघाट में इन सबका अभाव है और ये मशीन अभी से नहीं बल्कि साल भर से ज्यादा हो चुका है।

डॉक्टर की हुई नियुक्त

पिछले कई वर्षों से मांग की जा रही थी कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एक डॉक्टर होना चाहिए मगर गांव में कोई भी डॉक्टर सेवा देना नहीं चाहता। इसके पीछे भी कारण है कि गांव के लोग गवार की कहावत चरितार्थ होती है कि हम बड़े डॉक्टर कैसे गांव में रहेंगे हम शहर में ही ठीक है के कारण कोई भी डॉक्टर गांव में आना पसंद नहीं करता है पिछले एक वर्ष पहले डॉ नवीन डोडवा आए थे एक वर्ष की ट्रेनिंग के यहां से चले गए उनका कार्यकाल बहुत अच्छा था जिन्होंने पूरा समय गाँव में ही रहकर चौबीसों घंटे अस्पताल में रहते थे। वर्तमान में डॉ सचिन मंडोई की पदस्थापना हुई है जो करीब दो महीना होने जा रहा है यहां का पदभार ग्रहण किए है। मगर उनका मुख्यालय कटंगी कर दिया गया और आरोग्य मंदिर गोरेघाट में मात्र दो दिन मंगलवार और शुक्रवार को रहेंगे बाकी समय स्वास्थ्य केंद्र कटंगी में रहेंगे। खण्ड चिकित्सा अधिकारी के हिसाब से अब मरीजों को मात्र दो दिन ही बीमार होना है ताकि इन दो दिनों में डॉक्टर आकर मरीजों का इलाज कर सके और बाकी दिनों में कोई बीमार हो तो प्राइवेट डॉक्टर का पेट भर सके। डॉक्टर के आने से ग्रामीणों में खुशी की लहर साफ देखी जा सकती है।

डॉ सचिन मंडोई

कचरे के साथ जलाई जा रही है एक्सपायरी दवाई

यहां डॉक्टर के पदग्रहण करने से पहले बोरो से एक्सपायरी दवाईयां को कचरे के साथ जलाई जा रही थी। अगर दवाइयां मरीजों को दी जाती तो दवाइयां एस्पायर भी नहीं होती और मरीजों को इसका लाभ भी मिल जाता। इससे साफ लगता है कि कर्मचारी अपनी पेमेन्ट के लिए अस्पताल जाता है न कि लोगों की सेवा करने जाता है अगर सही सेवाएं देते तो इतनी दवाइयां एक्सपायर नहीं होती।

स्टाफ की है कमी

फिलहाल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गोरेघाट में पूरा स्टाफ नहीं है जिससे मरीजों को सेवाएं नहीं मिल पा रही है वर्तमान में एक डॉक्टर डॉक्टर सचिन मंडोई, श्रीमति गंगासागर वासनिक नर्सिंग ऑफिसर, श्रीमति सुनैना चित्रिव डी ई ओ, सुलोचना पिलगेर, संदीप बागड़े, साहिल उचबगले, रितेश रामटेके स्टाफ है। जबकि दो नर्सिंग ऑफिसर, लैब टेक्नीशियन, एक फार्मासिस्ट, महिला हेल्थ विजिटर(एल एच व्ही), महिला स्वस्थ्य कार्यकर्ता ( ए एन एम) , अस्पताल सहायक आदि स्टाफ की जरूरत है। जिसमें उच्चाधिकारियों से कर्मचारियों की बात की गई तो स्टाफ की कमी सभी अस्पतालों में बताई जाती है, मगर जब दूसरे जिले से अपने जिले में किसी कर्मचारी को लाने की बात करो तो जिले में सीटों से ज्यादा कर्मचारी की बात करते है तब सवाल यह आता हांकी आखिर बाकी के कर्मचारी गए कहा अगर आपके पास ज्यादा कर्मचारी है तब या फिर सभी शहरों के अस्पतालों में ज्यादा को क्यों रखा गया है।

खंडहर में तब्दील बिल्डिंग

अस्पताल की बिल्डिंग को बने हुए करीब 22 साल हो चुके है मगर एक भी वर्ष इसकी मरम्मत नहीं की गई और कभी मरम्मत भी गई तो लीपापोती कर दिया गया। जब प्रति वर्ष मरम्मत का पैसा आता है तो कहा जा रहा आप इससे यही समझ आता है कि अधिकारी लीपापोती करके अपने जेब गरम कर रहे है।

कही बैहर जैसी स्थिती न बन जाए

वर्तमान में बैहर में जो बच्चे अस्पताल की लापरवाही से बच्चों की मौत हुई है कही ऐसी हालत इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गोरेघाट की बन जाए क्योंकि पिछले कुछ दिनों से लगातार मरीजों की संख्या बढ़ रही है जिसमे बुखार, सर्दी, खांसी, पतले दस्त, उल्टी जैसे हालात हो रहे है अधिकतर ऐसे मरीज स्वयं के खर्च पर तुमसर, भंडारा, नागपुर महाराष्ट्र में जाकर मंहगा इलाज करने पर मजबूर हो रहे है।

कभी जांच में नहीं आते अधिकारी

पठार क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की जांच कभी नहीं होती है, ना कभी जिला चिकित्सा अधिकारी और ना ही खंड चिकित्सा अधिकारी आते है जिससे कर्मचारियों के हौसले बुलंद है क्योंकि पता है कि यहां कोई अधिकारी आने वाला है नहीं, और सी एम हेल्पलाइन से शिकायत करो तो शिकायतकर्ता को लॉलीपॉप देकर शिकायत वापस दिला दी जाती है जिससे इनकी शिकायत ऊपर तक पहुंच ही नहीं पाती है।

डॉ से चर्चा करते जनप्रतिनिधि
डॉ से चर्चा करते हुए जनप्रतिनिधि

औचक निरीक्षण में गायब मिली बीपी और शुगर मशीन

आज दिनांक 08/09/2026 दिन मंगलवार को दोपहर भू पूर्व सरपंच श्री रमन बिटले,श्री संग्रामें जी, श्री नंदकिशोर जामुनपाने सरपंच प्रतिनिधि ग्राम पंचायत गोरेघाट ने औचक निरीक्षण किया जिसमें ग्रामीणों की बार बार शिकायत मिल रही थी कि दवाइयां नहीं दी जाती। बीपी चेक नहीं किया जाता शुगर चेक नहीं किया जाता। निरीक्षण में पाया गया कि दवाइयां बराबर मरीजों नहीं दी जाती और बीपी और शुगर की मशीन नहीं होने से उनकी जांच नहीं होती।

डॉ सचिन मंडोई ने दिया भरोसा

डॉ सचिन मंडोई ने ग्रामीणो को भरोसा दिलाया है कि किसी प्रकार की शिकायत का मौका नहीं दिया जाएगा अगर कोई कर्मचारी लापरवाही करता है तो इसे दंडित किया जाएगा और दवाइयां भी जरूरत के हिसाब से दी जाएगी।

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