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तिरोड़ी में कथित अवैध मिट्टी खनन पर उठे सवाल, कार्रवाई नहीं होने से प्रशासन की भूमिका पर चर्चा

तिरोड़ी में कथित अवैध मिट्टी खनन पर उठे सवाल, कार्रवाई नहीं होने से प्रशासन की भूमिका पर चर्चा

तिरोड़ी। नगर के वार्ड क्रमांक 16 में कथित रूप से अवैध मिट्टी खनन और उसकी बिक्री का मामला सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर प्रशासन की कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि कुछ लोगों द्वारा निजी ट्रैक्टरों का उपयोग कर मिट्टी का खनन किया जा रहा है और बाद में उसे बेचने का काम किया जा रहा है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह खनन एवं परिवहन संबंधी नियमों के उल्लंघन का मामला हो सकता है।

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में मिट्टी के अवैध उत्खनन को लेकर संबंधित अधिकारियों को कई बार जानकारी दी गई, लेकिन इसके बावजूद अपेक्षित कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है। शिकायतों के बाद भी यदि मौके पर जांच नहीं होती या जांच के बाद कार्रवाई नहीं की जाती, तो इससे अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों के हौसले बढ़ने की आशंका रहती है।

 

शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं?

 

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि प्रशासन को कथित अवैध खनन की जानकारी दी जा चुकी है, तो अब तक इसकी जांच क्यों नहीं की गई? क्या संबंधित विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर खनन स्थल, ट्रैक्टरों और मिट्टी के परिवहन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की है? यदि जांच हुई है तो उसका परिणाम क्या रहा और यदि जांच नहीं हुई तो शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

 

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मौके का निरीक्षण करना चाहिए और यह स्पष्ट करना चाहिए कि वहां मिट्टी का उत्खनन किसकी अनुमति से किया जा रहा है।

 

राजनीतिक या प्रभावशाली दबाव की भी चर्चा

 

कार्रवाई नहीं होने के कारण क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं भी होने लगी हैं। कुछ लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि कहीं किसी प्रभावशाली व्यक्ति या राजनीतिक स्तर से दबाव तो नहीं है, जिसके कारण संबंधित विभाग कार्रवाई करने से बच रहा है।

 

हालांकि, किसी नेता या राजनीतिक व्यक्ति द्वारा प्रशासन पर दबाव बनाए जाने की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस तरह के आरोपों को तथ्य के रूप में नहीं कहा जा सकता। यदि वास्तव में किसी प्रकार का दबाव है, तो उसकी पुष्टि निष्पक्ष जांच से ही हो सकती है।

 

प्रशासन करे निष्पक्ष जांच

 

मामले में प्रशासन के सामने अब दो महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं। पहली, वार्ड क्रमांक 16 में जहां-जहां मिट्टी का कथित उत्खनन हो रहा है, वहां मौके पर जाकर जांच की जाए। दूसरी, मिट्टी के खनन और परिवहन में लगे वाहनों तथा संबंधित व्यक्तियों के पास आवश्यक अनुमति और दस्तावेज हैं या नहीं, इसकी जांच की जाए।

 

यदि जांच में अवैध खनन की पुष्टि होती है तो संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं यदि शिकायतें गलत पाई जाती हैं तो प्रशासन को इसकी जानकारी भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि लोगों के बीच चल रही चर्चाओं पर विराम लग सके।

 

जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी नजर

 

इस पूरे मामले में संबंधित विभाग के स्थानीय अधिकारियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए प्रशासन के पास निरीक्षण और कार्रवाई के अधिकार हैं। ऐसे में लगातार शिकायतों के बावजूद यदि कोई कार्रवाई नहीं होती है तो इसकी भी समीक्षा की जानी चाहिए कि शिकायत मिलने के बाद अधिकारियों ने क्या कदम उठाए।

 

स्थानीय लोगों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और जांच की जानकारी सामने लाई जाए। लोगों का कहना है कि सरकारी राजस्व और पर्यावरण से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

 

अब देखने वाली बात यह होगी कि वार्ड क्रमांक 16 में कथित अवैध मिट्टी खनन की शिकायतों पर प्रशासन कब तक संज्ञान लेता है और क्या मौके पर जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाता है। साथ ही यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि आखिर शिकायतों के बावजूद कार्रवाई में देरी का कारण क्या है।

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