पारंपरिक रूप से मनाया गया पोला का पर्व
सुशील उचबगले की रिपोर्ट
गोरेघाट तिरोड़ी
पठार क्षेत्र के तथा महाराष्ट्र से लगे ग्राम गोरेघाट सहित कुड़वा, भोंडकी, संग्रामपुर,अंबेझरी, कन्हडगांव, महकेपार आदि गांव में पारंपरिक रीति रिवाज के साथ पोला का त्यौहार मनाया गया। आज के दिन बैलों की पूजा अर्चना की जाती है जो कि बैल साल भर खेती कर काम में सहायक होते है हमारा भारत देश जो कि कृषि प्रधान देश है और बैल जिसके वजह से खेती में अनाज तैयार किया जाता है। खेती के कार्य जिसमे धान का रोपा लगाने के बाद लोग खेती के काम काज से फुर्सत होते है और आज के दिन बाजार चौक में इकट्ठा होकर बैलों की पूजा की जाती है और सभी लोग एक दूसरे को तिलक लगाकर आपस में मेल मुलाकात करते है। उसके पश्चात सभी लोग अपने अपने घर को प्रस्थान करते है।

