सिमरोल हत्याकांड: सबूतों के अभाव में सभी आरोपी बरी, कोर्ट ने कहा- हत्या साबित, लेकिन आरोपी नहीं
महू। सिमरोल थाना क्षेत्र में 24 दिसंबर 2024 को हुए बहुचर्चित अश्वंत उर्फ बारीक हत्याकांड में पंचम अपर सत्र न्यायालय, डॉ. अंबेडकर नगर (महू) ने सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। न्यायालय ने अपने विस्तृत फैसले में कहा कि यह तो स्पष्ट है कि मृतक की हत्या हुई थी, लेकिन अभियोजन पक्ष यह प्रमाणित नहीं कर सका कि इस वारदात को अंजाम आरोपियों ने ही दिया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने माना कि मौत प्राकृतिक नहीं थी, बल्कि हत्या के कारण हुई थी। इसके बावजूद मामले में पेश किए गए परिस्थितिजन्य साक्ष्य आरोपियों की संलिप्तता को संदेह से परे स्थापित नहीं कर सके।
फैसले में न्यायालय ने अभियोजन की जांच और प्रस्तुत साक्ष्यों पर कई सवाल उठाए। ‘लास्ट सीन’ थ्योरी, गवाहों के बयान, मोबाइल कॉल डिटेल, इंस्टाग्राम चैट, कथित हथियारों की बरामदगी और एफएसएल रिपोर्ट को लेकर पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले। आरोपियों की निशानदेही पर जब्त किए गए बांस के डंडों पर मानव रक्त मिलने की पुष्टि तो हुई, लेकिन रक्त का समूह निर्धारित नहीं होने से यह साबित नहीं हो पाया कि वह मृतक का ही था।
अदालत ने यह भी कहा कि इंस्टाग्राम पर हुए कथित विवाद को हत्या का कारण बताया गया, लेकिन उससे जुड़े इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को विधिसम्मत तरीके से प्रमाणित नहीं किया जा सका। इसी तरह मोबाइल फोन की बरामदगी और कॉल डिटेल रिकॉर्ड भी अभियोजन की कहानी को मजबूती नहीं दे सके।
इन परिस्थितियों को देखते हुए न्यायालय ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 61, 103 और 238 के तहत लगाए गए सभी आरोपों से आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। साथ ही आदेश दिया कि यदि किसी अन्य प्रकरण में उनकी आवश्यकता न हो तो जेल में बंद आरोपियों को तत्काल रिहा किया जाए।
बचाव पक्ष की दलीलों को मिली अहमियत
मामले में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद कुमार बाथम के साथ अधिवक्ता मनोज द्विवेदी, अभिषेक शर्मा, शैलेश यादव और हिमांशु शर्मा ने पक्ष रखा। उन्होंने न्यायालय के समक्ष जांच प्रक्रिया, बरामदगी, एफएसएल रिपोर्ट, कॉल डिटेल और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों में मौजूद खामियों और विरोधाभासों को विस्तार से रखा। न्यायालय ने इन दलीलों पर विचार करते हुए माना कि अभियोजन आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत करने में असफल रहा, जिसके चलते सभी आरोपियों को बरी करने का निर्णय सुनाया गया।

